Shreyas Iyer, IPL: कप्तान बेबस, मैनेजमेंट हावी... आखिर क्यों छलका श्रेयस अय्यर का दर्द?

 आईपीएल का 15वां सीजन अब अपने अगले चरण की ओर बढ़ रहा है. इस बीच कोलकाता नाइट राइडर्स के कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम के हालात पर एक अहम खुलासा किया है, जिससे प्रबंधन निशाने पर आ गया है.




आईपीएल का 15वां सीजन प्लेऑफ की तरफ बढ़ रहा है. दुनिया की सबसे लुभावनी टी20 लीग का सूरत-ए-हाल उसकी अंकतालिका बयां कर रही है. गुजरात टाइटन्स (GT) और लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) अपने डेब्यू सीजन में ही कमाल का प्रदर्शन कर प्लेऑफ में धूम मचाने को तैयार हैं. राजस्थान रॉयल्स (RR) और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) भी मजबूती से प्लेऑफ की ओर बढ़ रही हैं. दूसरी तरफ, दिल्ली कैपिटल्स (DC), सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) और पंजाब किंग्स (PBKS) ने भी प्लेऑफ की अपनी उम्मीदें छोड़ी नहीं हैं.



... लेकिन कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) मौजूदा आईपीएल से बाहर होने की कगार पर है. इस बार की फिसड्डी टीम मुंबई इंडियंस (MI) से हार मिलते ही कप्तान श्रेयस अय्यर का एक ऐसा बयान आया, जिससे अब फ्रेंचाइजी निशाने पर है. दरअसल, सवाल उठने लगे हैं कि क्या फ्रेंचाइजी के अत्यधिक दखल से केकेआर के प्रदर्शन का ग्राफ नीचे गिरा है. सच तो यह है कि अब तक 12 मैचों में 20 खिलाड़ियों को मौका दिया गया है और एक भी मैच ऐसा नहीं रहा जब समान प्लेइंग इलेवन रखी गई होआइए अब कोलकाता के कप्तान अय्यर के उस बयान पर नजर डालते हैं, जिसमें उन्होंने टीम के इस हाल के लिए प्रंबधन को जिम्मेदार ठहराया है. टीम में बार-बार बदलाव से परेशान अय्यर ने कहा, 'यह काफी मुश्किल है. कोच और कई बार सीईओ भी टीम चयन में शामिल होते हैं.' जाहिर है कई मसलों पर प्रबंधन और कप्तान एक जैसी राय नहीं रख सकता, जिससे टीम के प्रदर्शन पर असर पड़ा है.


ये वही श्रेयर अय्यर हैं, जिनकी कप्तानी में दिल्ली कैपिटल्स ने दो साल पहले फाइनल में जगह बनाई थी. शायद तब उनकी और प्रबंधन की ट्यूनिंग फिट बैठ रही होगी. लेकिन केकेआर की बागडोर संभालते ही यह एकदम उल्टा पड़ गया है. इसकी वजह टीम सेलेक्शन को लेकर खराब फैसले हैं. अगर ऐसा नहीं है तो दुनिया के नंबर एक तेज गेंदबाज पैट कमिंस को 5 मैचों में बाहर कैसे रखा गया. टीम इंडिया के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने भी यही सवाल दागा था.


14 साल पुरानी लीग में कुछ नया हो रहा

 

दरअसल, 2008 में शुरू हुआ आईपीएल अब 14 साल पुराना हो गया है. ऐसे में फ्रेंचाइजी से जुड़ी कई चीजें का बदलना भी तय था. इसकी बानगी 2022 के मेगा ऑक्शन में साफ दिखी. खिलाड़ी खरीदते वक्त टीम मालिकों के बेटे-बेटियों ने अपने फैसले को मनवाया. उस वक्त टीम प्रबंधन से जुड़े बड़े-बड़े पूर्व क्रिकेटरों को भी ऑक्शन के टेबल पर इस 'नई पीढ़ी के मालिकों' के आगे सिर झुकाना पड़ा. तो ऐसे में खिलाड़ियों पर पैसे लगाने से लेकर प्लेइंग इलेवन के चयन में उनका (प्रबंधन) का ही चलेगा. चाहे वह फैसला बाद में उल्टा ही क्यों न पड़ जाए.  


तभी तो फरवरी के मेगा ऑक्शन के बाद ही सनराइजर्स हैदराबाद के असिस्टेंट कोच साइमन कैटिच ने अपना पद छोड़ दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने टीम पर आरोप लगाया था कि मेगा ऑक्शन में पूर्व निर्धारित योजनाओं को किनारे कर दिया गया. यानी  प्रबंधन का इतना दखल टीम को गर्त में ले जा सकता है. कप्तान पर तो भरोसा करना ही होगा. नहीं तो वही होगा, जो केकेआर का हुआ. 


यह भी सच है कि केकेआर के कोचिंग स्टाफ में ब्रेंडन मैक्कुलम, डेविड हसी जैसे पूर्व क्रिकेटर शामिल हैं... फिर प्रबंधन की यह 'सेंधमारी' समझ से परे है. केकेआर के सीईओ वेंकी मैसूर चयन मामलों में उनके दखल से जुड़े सवाल पर जरूर कहेंगे कि अय्यर के बयानों को तोड़ मरोड़कर पेश किया गया... लेकिन कहीं तो कुछ सच्चाई इसमें जरूर है.


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